| Article Title |
सुमित्रानंदन पंत के काव्य में प्रकृति-सौंदर्य का भावात्मक स्वरूप |
| Author(s) | प्रतिभा कुमारी. |
| Country | India |
| Abstract |
छायावादी काव्यधारा में प्रकृति-चित्रण का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है और सुमित्रानंदन पंत को इस धारा का प्रमुख तथा प्रकृति के सुकुमार कवि के रूप में विशेष पहचान प्राप्त है। पंत के काव्य में प्रकृति केवल दृश्य सौंदर्य का विषय नहीं है, बल्कि वह कवि की संवेदनाओं, अनुभूतियों और कल्पना का अभिन्न अंग बनकर सामने आती है। उनके काव्य में पर्वत, वन, पुष्प, चाँदनी, बादल और ऋतुओं के विविध रूप अत्यंत सजीव और भावपूर्ण ढंग से चित्रित हुए हैं। पंत ने प्रकृति के माध्यम से प्रेम, करुणा, आशा और आनंद जैसे मानवीय भावों की अभिव्यक्ति की है। उनके काव्य में प्रकृति का मानवीकरण भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जहाँ प्रकृति कभी माता, कभी सखी और कभी प्रेयसी के रूप में कवि के साथ आत्मीय संबंध स्थापित करती है। साथ ही उनके काव्य में प्रकृति के माध्यम से आध्यात्मिक अनुभूति और दार्शनिक चेतना का भी संकेत मिलता है। इस प्रकार पंत का प्रकृति-चित्रण केवल सौंदर्य-बोध तक सीमित नहीं है, बल्कि वह मानव जीवन, संवेदना और दर्शन से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। अतः पंत के काव्य में प्रकृति-सौंदर्य का भावात्मक स्वरूप हिन्दी काव्य परंपरा में एक महत्वपूर्ण और विशिष्ट स्थान रखता है। |
| Area | हिन्दी साहित्य |
| Issue | Volume 1, Issue 1 (January - March 2026) |
| Published | 2026/03/05 |
| How to Cite | सबद पत्रिका, 1(1), 29-34. |
View / Download PDF File